भ्रष्टाचारियो को पकड़ने के लिए एक मशीन बनी ,
अमेरिका मे--- एक दिन मे 9 पकडे गए ,
चीन मे --- 30 ,
इंग्लैंड मे --- 50 ,
और इंडिया मे --- ??????
1 घंटे मे मशीन चोरी हो गयी !
भ्रष्टाचारियो को पकड़ने के लिए एक मशीन बनी ,
अमेरिका मे--- एक दिन मे 9 पकडे गए ,
चीन मे --- 30 ,
इंग्लैंड मे --- 50 ,
और इंडिया मे --- ??????
1 घंटे मे मशीन चोरी हो गयी !
क्या आप इस देश का अन्न का उपयोग अपना जीवन चलने के लिए नहीं करते है?
क्या इस देश की आबोहवा आपके स्वांसो को गति नहीं देती?
क्या इस देश की भूमि आपको शरण नहीं देती?
जिस देश में जीवन पाया ,उसके संसाधनों का उपयोग किया, क्या उसके प्रति हमारी जवाबदेही नहीं है?
सभी भारतवासी एकजुट हो और अपने जिन्दा रहने का एहसास करे.....
भ्रष्टाचार को जड़ से समाप्त करे .
नौकरी करते हुए मनुष्य ऐसे परजीवी (पैरासाइट्स) की भांति होता है, जो अपना जीवनयापन तो कर सकता है लेकिन अपना विकास नहीं कर सकता है।मध्यम आय वर्ग की विशेषता होती है कि वह अपनी आय का लगभग पूरा भाग अपनी रोजमर्रा की जरूरतों कों पूरा करने ,अपने लिए जमीन खरीद कर मकान बनाने और जीवनयापन करने मे खर्च कर देते है ।जिससे जाने-अनजाने और मजबूरी मे अपनी पूँजी से दूसरो को अमीर बनाते है। जिससे उनकी अगली पीढ़ी मे रोजगार की समस्या फिर जस की तस बनी रहती है। यह एक ऐसा दुष्चक्र है जो आसानी से तोड़ा नहीं जा सकता है।
1. क्या संसार के अलग-अलग भागों मे लगी आग मात्र संयोग है?
2. क्या संसार के अलग-अलग भागों मे आई बाढ़ मात्र संयोग है?
3. क्या संसार के अलग-अलग भागों मे उसर होती जमीन तथा उपज मे आई भारी कमी मात्र संयोग है?
4. क्या संसार के अलग-अलग भागों मे अचानक हुए मौसम मे परिवर्तन मात्र संयोग है?
5 क्या धरती का बढ़ता तापमान खतरे का संकेत नही है?
6. क्या पिघलते ग्लेशियर धरती पर वर्तमान जीवन मे भारी परिवर्तन का संकेत नही दे रहे है?
7. क्या समुद्र का जल-स्तर नही बढ़ रहा है? और निचले स्थलीय भागों के पानी मे डूब जाने तथा उनका अस्तित्व समाप्त हो जाने का खतरा नही बढ़ रहा है?
इस खूबसूरत धरती पर अपना पूर्ण अधिकार समझने वाला,धरती के सभी जीव-जन्तु मे अपने को श्रेष्ठ समझने वाला तथा उपभोग करने वाला आज का बुद्धिमान मनुष्य है। फिर वही मनुष्य इस धरती का विनाश क्यो कर रहा है? क्यो बढ़ते हुऐ खतरों से अंजान बना हुआ है? हम आने वाली अपनी पीढी को कैसी धरती और कैसा पर्यावरण देंगे? आज देर ही नही बहुत देर हो चुकी है। हम कभी भी पूरी नही हो सकने वाली छति की ओर बढ़ चुके है।
शायद कुछ लोग इन बातो को कोरी बकवास समझे। लेकिन यह सच है की कल इस लेख को लिखने के लिए न हम होंगे न आप और न ही इसे पढ़ने के लिए होगी हमारी मानव पीढी।
